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अपने - पराये मै फर्क़ नही... "अस्तित्वा एक स्त्री का"

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तमाशा खुली आँखो से बेफिक्री से देख रहे हो दुनिया वालो तुम... ना कोई रोक है, ना कोई टोक है, सब अनदेखा कर रहे हो तुम... कोई बात नही, क्या फर्क़ पड़ता है? अपना नही है, सोचकर आगे बढ रहे हो तुम... वक्त नही है, काम बहुत है, मै नही कोई और देख लेगा, यही सोच रहे हो तुम... जब बहन-बेटी-बीवी किसी और की हो, झट से आगे निकल जाते हो तुम... अपने घर की इज्जत पर हाथ डाल दे कोई, तो आग-बबूला हो जाते हो तुम... फिर ना वक़्त की चिन्ता, ना काम की चिन्ता, बस गन्दगी मिटाने को भिड़ जाते हो तुम... खून मै वो उबाल उठता है, कि मरने-मारने को तैयार हो जाते हो तुम... फिर किसी और बहन-बेटी के नाम पर, क्यूँ चुप हो जाते हो तुम... गरिमा तो हर स्त्री की जरूरी है, समाज तो सब से है और इसी समाज मै हो तुम... नही अगर गौर करोगे इस पर, ना ये समाज बचेगा और ना ही बचोगे तुम... अस्तित्वा अगर उसका मिटेगा, तो कैसे अस्तित्वा मै रहोगे तुम... _KD...

ख्वाईशे जरूरी है जिन्दगी जीने के लिये...

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कुछ ख्वाईशे खुद मै जिन्दा रख ए मुसाफिर, सफर-ए- जिन्दगी से कुछ उम्मीदें तो रहेगी... खुद की साँसो की एक वजह तो मिलेगी, कुछ कर गुजरने की तुझमे एक चाह तो रहेगी... सफर का कोई वज़ूद, दिल मै तसल्ली तो रहेगी, साथ अपनो के रहने की कोई वजह तो मिलेगी... है जीने की एक वजह, नही ये सोच गर रहेगी, जिन्दगी बोझ, और हर पल तिल-तिल मौत हिस्से बचेगी... बिना ख्वाइशों के ना जिन्दगी की कोई औकात रहेगी, तू कौन है? क्या चाहिये? क्या रह गया? यही सोच बचेगी... संग हो कुछ ख्वाइशें, तो जिन्दगी भी हँसेगी, फिर तुझमे ये जिन्दगी पूरे मन से खुशी-खुशी रहेगी... हर फर्ज़ पूरा होगा, खुशी से ये जिन्दगी कटेगी, तब मौत भी सुकून की होगी, ना संग कोई इच्छा जलेगी... _KD...

राज़ छुपाकर रक्खा है...

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इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... जो शामिल नही जिन्दगी मै मेरी, उस शख्स को शामिल रक्खा है... मिली नही मुहब्बत जिसकी, मेरी मुहब्बत को उसके लिये रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... चाहा नही जिसने हमे कभी, अपनी चाहत को उसके लिये रक्खा है... बेवफाई से उसका नाता सही, मेरा दिल वफ़ा का उसके लिये रक्खा है... जो छोड़कर मुझे अँधेरों मै गया, मेरे दिल मै उजाला उसके लिये रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... मेरे दिल को जिसने दिल ना समझा, उसके नाम को सीने मै दबाकर रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... _KD...

बुद्ध हो जायेंगे हम...

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प्रेम से अनुराग से शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... द्वेष और नफरतों को पी शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... सच्चाई के पथ पर जो चलो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... हृदय को जो निर्मल रखो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... मौक्ष का जो मन रखो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... जीवन का अर्थ समझो तो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम...

मेरे कमरे की वो खिड़की...

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मेरे कमरे की खिड़की से, वो खुला आसमान नजर आता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... हवा का झौंका वो सुबह-सुबह का, छूकर गुजर जाता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मन्दिर के वो भजन घन्टियाँ, सुबह-शाम सुनाई देती है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मेरे कमरे की खिडकी से, तितलियाँ रँग-बिरंगी नजर आती मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... रातो मै तारो की वो जगमग, दूर उस आसमान मै नजर आती है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... चिड़ियों की चहचहाट मै भी, मधुर संगीत सुनाई देता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मेरे बचपन का वो कमरा, वो खिड़की , और मेरा वो खुला आसमान,, माँ ये बहुत भाता था मुझको... गाँव अपना बहुत याद आता है मुझको,, बहुत याद आता है मुझको...

तुझसे दूर नही हूँ मैं...

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तुझसे दूर नही हूँ मैं... तेरे पास तेरे करीब हूँ मै,, दिल का तेरा एहसास हूँ मैं... सावन की घनघोर घटा बरसती है जब, वो तेज बरसता पानी हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... जो सरसराहट से गुजर जाती है तुझे छूकर, वो तेज हवा का झौंका हूँ मैं... तेरे मखमल से पैरो तले जो दबती है, वो हरी दूब की घांस हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... कहर बरसाती उस धूप मै भी, वो ठंडी-ठंडी छाँव हूँ मैं... दुख जब तुझको बड़ा रुलाये, सुख की तेरी उम्मीद हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... तेरे लबों पर जो रुक-रुक कर आये, वो मन्द-मन्द मुस्कान हूँ मैं... जो धड़कता है तेरे दिल मै, उस दिल का अरमान हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं...

जो तुम आओ तो...

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हाल-ए-दिल बयाँ कर दें , ज़ख्म खुद्के खुद से ही भर दें , जो तुम आओ तो... गर्म रेत भी ठण्डी कर दें , उस तपिश को बारिश कर दें , जो तुम आओ तो... धरती बंजर हरी कर दें , घाटी वो फिर फूलो सी कर दें , जो तुम आओ तो... इस घर को मन्दिर कर दें , बुझते दिये को फिर भर दें , जो तुम आओ तो... आँखो मै चमक कर दें , होंठो पर हँसी कर दें , जो तुम आओ तो... फूलों मै महक कर दें , भवरों को अमर कर दें , जो तुम आओ तो...