ख्वाईशे जरूरी है जिन्दगी जीने के लिये...

कुछ ख्वाईशे खुद मै जिन्दा रख ए मुसाफिर,
सफर-ए- जिन्दगी से कुछ उम्मीदें तो रहेगी...

खुद की साँसो की एक वजह तो मिलेगी,
कुछ कर गुजरने की तुझमे एक चाह तो रहेगी...

सफर का कोई वज़ूद, दिल मै तसल्ली तो रहेगी,
साथ अपनो के रहने की कोई वजह तो मिलेगी...

है जीने की एक वजह, नही ये सोच गर रहेगी,
जिन्दगी बोझ, और हर पल तिल-तिल मौत हिस्से बचेगी...

बिना ख्वाइशों के ना जिन्दगी की कोई औकात रहेगी,
तू कौन है? क्या चाहिये? क्या रह गया? यही सोच बचेगी...

संग हो कुछ ख्वाइशें, तो जिन्दगी भी हँसेगी,
फिर तुझमे ये जिन्दगी पूरे मन से खुशी-खुशी रहेगी...

हर फर्ज़ पूरा होगा, खुशी से ये जिन्दगी कटेगी,
तब मौत भी सुकून की होगी, ना संग कोई इच्छा जलेगी...

_KD...





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