वो तेरे वादे...



वादे किये थे बहुत मुहब्बत मैं उन्होने अपनी,
हम वादो पर उनके जिन्दगी अपनी जीते रहे...
और वो बेवफाई पर बेवफाई करते चले गये,,

पूछा जब, क्यूँ किया तुमने मेरे साथ ऐसा,,
पूछा जब, क्यूँ किया तुमने मेरे साथ ऐसा,,
हँस के कह गये, तुम दूर बहुत थे और वो बांहों मैं रोज आते थे हमारी..

नही पता था दूरियाँ मुहब्बत को मिटा देती है...
वफ़ा को बेवफाई मैं बदल देती है...
हमे तो दूर रहकर भी सिर्फ उनसे मुहब्बत रहती है !!

    

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