मुद्दत सी हो गयी है...


मुद्दत सी हो गयी है तेरी चाहत को जिये हुये,
कि आ..आज फिर आकर मुझसे बेवफाई ही कर ले,,

तू कहती थी, तुम्हे अपने इश्क़ मैं मार ही दूंगी,
इस बेजान दिल को आज फिर उसी आग मैं जला दे,,

आँखो के वो आंसू जो सूख चुके है मेरे,
कि आज फिर उन पलकों को गीला ही कर दे,,

जिन्दा तो हूँ अब तक, तुझे याद करते-करते,
कि थक गया हूँ मै अब तुझमे रहते-रहते..

मुद्दत सी हो गयी है तेरी चाहत को जिये हुये,
कि आ.. आज फिर आकर मुझे पूरा ही मार दे,,




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