कश्मकश इस दिल की...
अश्क़ बह चले... ना दूर जाने से उन्हे रोक सके,
हम भी सच्ची मुहब्बत के भ्रम मैं थे, और वो चले गये...
टूट - टूटकर बेखुदी मैं तेरी, दिल ये रोता रहा...
रात भर ये दिल मुहब्बत मैं तेरी, जोरो से धड़कता रहा...
कभी सोचा, लौटकर वापिस वो जरूर आयेंगे,,
कभी सोचा, वो किसी और के तो नही हो जायेंगे...!
दिल ने कहा रोक लूं तुझे, फिर सोचा तेरा इम्तिहांन भी लेंगे,
हम जिस कदर टूटकर चाहते है तुझे, तेरी चाहत भी देख लेंगे,,
पर सच्ची मुहब्बत मै ऐसा होता कहाँ है,,
मिटने वाले को मुहब्बत मैं, मुहब्बत का जहां मिलता कहाँ है,,
याद रखना ऐ दिल दुखाकर दूर जाने वाले ,,
रूह मैं बसकर मुहब्बत करने वाले, इस दुनिया मैं मिलते नही हैं !!
अश्क़ बह चले ना दूर जाने से उन्हे रोक सके,
हम भी सच्ची मुहब्बत के भ्रम मैं थे, और वो चले गये....!!

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