चाहत ये मेरी...

चाहत है मुझे अंबर को छू लेने की,
काश कि खुदा ने दो पंख मुझे भी दिये होते...

चाँद तक पहुँच नही मेरी,
तारे ही सही तोडे तो होते...

सुन रे पँछी तुझ तक सही,
बादलों तक तो पहुँचे होते...

चाहत है मुझे अंबर को छू लेने की,
काश कि खुदा ने दो पंख मुझे भी दिये होते...





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