काफिला ये तेरी यादों का...


चाँद से कोई कह दो यूँ जाया ना करे,
बड़ी मुस्किल से लौटे है ख्वाबों से उनके...

सूरज से कह दो यूँ जल्दी आया ना करे,
फिर से लौट गये है वो फिर रात के ख्वाबों के लिये...

रात से कोई कह दो यूँ सोया ना करे,
बड़ा लम्बा है ये दिन उनके बिना जीने के लिये...

चलो फिर उठा लेती हूँ ये कलम अब अपनी,
काफिला ये उनकी यादों का फिर से चलाने के लिये...

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