ऐ खुदा....

मुनासिफ़ नही कि रोज तेरे दर पर सर झुका सकूं ,
ऐ खुदा इनायत इतनी रखना कि जहाँ भी रहूँ नाम तेरा ले सकूं,,

गरीब हूँ, फकीर हूँ, पर रहम से तेरे लाचार नही हूँ,,
दिनभर की मेहनत ही सही, पर तुझे हर वक्त याद कर सकूं,,

मुनासिफ़ नही कि रोज तेरे दर पर सर झुका सकूं ,
ऐ खुदा इनायत इतनी रखना कि जहाँ भी रहूँ नाम तेरा ले सकूं ।।

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