माँ...

सुना है माँ  सा खूबसुरत रिश्ता कोई और नही है जमीं पर,
फिर क्यू एक बेटे की माँ, बहू के आने पर बदल सी गयी है।

शादी से पहले बेटे के हर दर्द को समझती थी जो माँ,
फिर क्यू बेटे का प्रेम पत्नी के लिये देखकर, कुछ बदल सी गयी है।

माँ सिर्फ माँ होती है, फिर चाहे बेटे या बहू की होती है
आज क्यू माँ की ममता फिर, बेटे के प्रेम से जलने सी लगी है।

जो कहती थी बहू नही बेटी बनाकर रखूंगी इसे...
फिर क्यूं बेवजह वो माँ, लफ्जों से अपने मुकर सी गयी है।

माँ सिर्फ माँ होती है, चाहे तेरी या मेरी होती है...
ममता की छाँव ना मिले जँहा पर, फिर वो कैसी माँ होती है।।



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