तो मज़ा आये ...

जिस्म पर जो फतह की तो क्या फतह की,,
दिल पर फतह कर दिखाओ तो मज़ा आये...

जाम पर जाम जो पिये तो क्या जाम पिये,,
हुस्न की आँखो से जमकर पियो तो मज़ा आये...

मर-मरकर इश्क़ मै जिये तो क्या जिये,,
आग सीने मै उनकी भी ये लगा दो तो मज़ा आये...

मुहब्बत मै उनको जो समझाया तो क्या समझाया,,
बगावत वो खुद दुनिया से कर दे तो मज़ा आये...

चाहत मै उनकी यूँ तड़पकर जिये तो क्या जिये,,
चाहत मै वो भी तुम्हारी इस कदर तड़पे तो मज़ा आये...

जिस्म पर जो फतह की तो क्या फतह की,,
दिल पर फतह कर दिखाओ तो मज़ा आये...


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