गुम हो गयी उनके चेहरे की वो रौनक...



















महफिल मै हर एक जगह रौनक दिखी मुझे,
सिवाए उसके चेहरे की रौनक अब नही दिख रही थी...

महफिल का हर एक दिल, जोरो से धड़कता था,
सिवाए उनके दिल की धड़कन के, जो अब ना सुनाई देती थी...

महफिलो की रौनक जो हुआ करती थी,
आज महफिल मै खुद की बुझी-बुझी सी दिख रही थी...

महफिल मै हर सख्श की जो जान हुआ करती थी,
आज खुद मै वो ही, बेजान सी दिख रही थी...

महफिल मै उसकी हर एक डूबा था मदहोशी मै,
एक वो थी जो उस मदहोशी से दूर अंधेरो मै कही बैठी थी...

महफिल मै हर एक जगह रौनक दिखी मुझे,
सिवाए उसके चेहरे की रौनक अब नही दिख रही थी...

महफिल मै हर दिल, दिलनशीं मै मशगूल था,
सिवाए उसके जो शायद दिल के दर्द मै कही डूबी थी...




















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