कोई भी दिन, ना हो तेरे बिन...प्यारी माँ...
खूबसूरत, ममतामयी जो शब्द है वो है माँ,
मेरी प्यारी, हम सबकी प्यारी माँ...
बचपन मेरा लोरियों मै जिसकी झूमा,
बचपन मेरा लोरियों मै जिसकी झूमा...
हाँ, वो है मेरी प्यारी सी माँ...
दौड़कर पीछे मेरे, पूरे घर मै जो नाज उठाती थी मेरे,
वो है मेरी प्यारी सी माँ...
वो माँ ही थी जिसके आँचल मै मैने जीना सीखा,
हाँ, वो माँ ही थी जिसने हर दुख मेरे लिये सहा...
वो उँगली पकड़कर मुझे स्कूल तक ले जाना,
मेरा गुरु बनकर मुझे रोज पढ़ाना...
अच्छे-बुरे का फर्क़ बताना,
सही-गलत की मुझमे समझ लाना...
हाँ वो माँ ही थी जिसने मुझे अच्छा इन्सान बनाया,
पापा से झगड़कर वो मुझे कॉलेज पढ़ाना,
जिन्दगी मै आगे बढ़ने का मुझमे हौंसला जगाना...
सहेली बनकर जो दिल के मेरे करीब रही,
बातो ही बातो मै जो मुझे तज़ुर्बा देती रही...
भगवान बनकर जो मुझे समझती रही,
जिन्दगी मेरी जो खूबसूरत करती रही...
हाँ वो माँ ही थी जिसने हर पल मुझे सम्भाला,
जिन्दगी क्या है, कैसी जीनी है मुझे सिखाया...
माँ के इस रूप का सम्मान कीजिये,
क्यूंकि जो आपकी खुशी मै ही अपनी खुशी देखती है,
वो सिर्फ माँ है, सिर्फ माँ, और सिर्फ माँ...
मेरी प्यारी, हम सबकी प्यारी माँ...
बचपन मेरा लोरियों मै जिसकी झूमा,
बचपन मेरा लोरियों मै जिसकी झूमा...
हाँ, वो है मेरी प्यारी सी माँ...
दौड़कर पीछे मेरे, पूरे घर मै जो नाज उठाती थी मेरे,
वो है मेरी प्यारी सी माँ...
वो माँ ही थी जिसके आँचल मै मैने जीना सीखा,
हाँ, वो माँ ही थी जिसने हर दुख मेरे लिये सहा...
वो उँगली पकड़कर मुझे स्कूल तक ले जाना,
मेरा गुरु बनकर मुझे रोज पढ़ाना...
अच्छे-बुरे का फर्क़ बताना,
सही-गलत की मुझमे समझ लाना...
हाँ वो माँ ही थी जिसने मुझे अच्छा इन्सान बनाया,
पापा से झगड़कर वो मुझे कॉलेज पढ़ाना,
जिन्दगी मै आगे बढ़ने का मुझमे हौंसला जगाना...
सहेली बनकर जो दिल के मेरे करीब रही,
बातो ही बातो मै जो मुझे तज़ुर्बा देती रही...
भगवान बनकर जो मुझे समझती रही,
जिन्दगी मेरी जो खूबसूरत करती रही...
हाँ वो माँ ही थी जिसने हर पल मुझे सम्भाला,
जिन्दगी क्या है, कैसी जीनी है मुझे सिखाया...
माँ के इस रूप का सम्मान कीजिये,
क्यूंकि जो आपकी खुशी मै ही अपनी खुशी देखती है,
वो सिर्फ माँ है, सिर्फ माँ, और सिर्फ माँ...

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