ये मौसम मदमस्त सा...



















मौसम आये जाये ,
इस पर ना कोई हक़ जमाये...

कभी सर्दियो की ये ठंडक है,
कभी ये गर्मी जलाए...

कभी ये रिमझिम-रिमझिम बरसे,
जग की प्यास बुझाये...

लो आ गया बसन्त भी देखो,
भँवरे गीत सुनायें...

मधुर-मधुर रस चूस फूलों से,
अपनी प्यास बुझायें...

तितलियाँ चारो और मंडराती फिरती,
जीना ये तुमको सिखायें...


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