कुछ अपने और पराये...
सच कहते है, कुछ अपने नही पराये ही रहते है,
खून के रिश्ते सिर्फ इनके अपने होते है,
बाकी रिश्तो से इस कदर रूखे होते है...
दिल तोड़ते है, धोका देते है,,
ना हो खून का रिश्ता तो रँग बदल लेते है,
अपनों को समेट लेते है, दूसरों को बिखेर देते है...
सच कहते है कुछ अपने नही पराये ही रहते है,
अपनों के दिल को ये दिल समझते है,
ना हो अपनो का दिल तो मसल देते है...
अपना कहकर दग़ा करते है,
दग़ा करे जो उसे अपना कहते है,
अपने-पराये मै कितना फर्क़ ये रखते है...
बड़े अज़ीब है कुछ रिश्ते इनके,
छींनने वाले को अपना कहते है,
साथ देने वाले को पराया कहते है...
सच कहते है, कुछ अपने नही पराये ही रहते है,
मतलबी रिश्तो के लिये सब कुछ मिटा देते है,
जो हक़ीक़त मै हो अपना उसे रुला के रखते है...
बड़े अज़ीब है कुछ रिश्ते इनके,
जो अपने है वही हस्ती इनकी मिटा देते है,
सोच पराया हमे फिर जुल्म ढाते है...
सच कहते है कुछ अपने नही पराये ही रहते है...
खून के रिश्ते सिर्फ इनके अपने होते है,
बाकी रिश्तो से इस कदर रूखे होते है...
दिल तोड़ते है, धोका देते है,,
ना हो खून का रिश्ता तो रँग बदल लेते है,
अपनों को समेट लेते है, दूसरों को बिखेर देते है...
सच कहते है कुछ अपने नही पराये ही रहते है,
अपनों के दिल को ये दिल समझते है,
ना हो अपनो का दिल तो मसल देते है...
अपना कहकर दग़ा करते है,
दग़ा करे जो उसे अपना कहते है,
अपने-पराये मै कितना फर्क़ ये रखते है...
बड़े अज़ीब है कुछ रिश्ते इनके,
छींनने वाले को अपना कहते है,
साथ देने वाले को पराया कहते है...
सच कहते है, कुछ अपने नही पराये ही रहते है,
मतलबी रिश्तो के लिये सब कुछ मिटा देते है,
जो हक़ीक़त मै हो अपना उसे रुला के रखते है...
बड़े अज़ीब है कुछ रिश्ते इनके,
जो अपने है वही हस्ती इनकी मिटा देते है,
सोच पराया हमे फिर जुल्म ढाते है...
सच कहते है कुछ अपने नही पराये ही रहते है...

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