परिभाषा एक परिवार की...

परिवार बनता है प्रेम और संस्कारों से...
एक-दूसरे को अपना कहकर पर अपनाने से...

एक-दूसरे से अपने दिल की बात ना छुपाने से...
घर के लोगो को समझने और समझाने से...

सुख-दुख मैं साथ रहने से...
अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाने से...

परिवार बनता है सबक लेकर गलतियों से...
मिलकर साथ-साथ चलने से...

परिवार बनता है रूठे हुये को मनाने से...
मिलकर समस्याये सुलझाने से...

परिवार बनता है हम सबके रहम से...
ना खत्म करे इसे अपने स्वार्थ, ईर्ष्या और अहम से...











    

Comments

Popular posts from this blog

काश कि ऐसा होता...

अपने - पराये मै फर्क़ नही... "अस्तित्वा एक स्त्री का"

जिन्दगी रुकती है, फिर आगे बढ जाती है...