नींद मै कविता लिख रही हूँ...

नींद मै कविता लिख रही हूँ ,
कुछ हक़ीक़त कुछ सपने लिख रही हूँ ,
जो समझ सके दिल की बात वो बात लिख रही हूँ...

तेरे-मेरे गम हो कम वो दर्द लिख रही हूँ ,
छुपा के सारे शहर से तेरा नाम लिख रही हूँ ,
मिल जाये सारा जहां वो अरमान लिख रही हूँ...

दिल के अपने घावों की दवा मै लिख रही हूँ ,
जो तुझको हो पसन्द वो बात लिख रही हूँ ,
तेरे-मेरे प्रेम के एहसास मै लिख रही हूँ...

नींद मै कविता लिख रही हूँ  ,
चाँद और तारों की बात लिख रही हूँ ,
जो कर सके तू एहसास, वो जज़्बात लिख रही हूँ...








    

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