तुझे देखे ज़माना हो गया...

नही चाहा था ऐसा हो गया,
उसे देखे ज़माना हो गया...

जिन्हे देखकर दिल मेरा आबाद रहा,
वो दिल आज बेचारा वीरांना हो गया...

जो घर बनाया था चाहत मै उसकी,
वो घर मेरा अब बंजारा हो गया...

नही चाहा था ऐसा हो गया,
उसे देखे ज़माना हो गया...

जिसकी चाहत मै जीना चाहा,
वो खुद फलक़ का सितारा हो गया...

मुझको दीवाना इस कदर करके,
खुद ज़नाज़े मै रुखसत हो गया...

नही चाहा था ऐसा हो गया,
उसे देखे ज़माना हो गया...

Comments

Popular posts from this blog

काश कि ऐसा होता...

अपने - पराये मै फर्क़ नही... "अस्तित्वा एक स्त्री का"

जिन्दगी रुकती है, फिर आगे बढ जाती है...