कहाँ छिपे हो नटखट कृष्णा...

कमरे की बिखरी चीजो मै ग़ुम,
क्या यही कही छिपे हो तुम !!

जानती हूँ नही रह सकते मेरे बिना अब तुम,
कि आ जाओ अब और ना सताओ तुम !!

पता है बाते मेरी सारी सुन रहे हो तुम,
क्या अब भी सामने नही आओगे तुम !!

नटखट बड़े ही हो गये हो तुम,
कि सामने आ भी जाओ अब कृष्णा तुम !!

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