फरियाद मेरी भी सुन ले...















ए खुदा ज़रा सी इनायत तो कर दे,
बेबस खड़ी हूँ तेरे दर पर कब से,
जरा सा रहम तो अब तू कर दे...

भूल से भी कोई भूल तो नही की है,
फिर कब तक ये सज़ा,
दूर अब तो ये बेबसी तू कर दे...

सुना है दर से तेरे कोई खाली नही जाता,
फरियाद कुछ मैने भी की है,
झोली मेरी भी अब तू भर दे...

कहते है ज़र्रे-ज़र्रे मै तू बसा है,
रूह गर सच्ची हो तू उसकी सुनता है,
कभी तो कहीं तो दिल की मेरी ख्वाइश पूरी कर दे...

खुदगर्ज नही हूँ तू इतना जान ले,
रहम बस इतना तू कर दे,
जिन्दगी गर दी है तो थोड़ी खुशियाँ तो नाम कर दे...

तेरे दर पर हर रोज़ सजदा करती हूँ,
किसी रोज़ ऐसा भी तो कर,
मै सुबह उठू और तू खुशियाँ मेरे आंगन कर दे...

ए खुदा ज़रा सी इनायत तो कर दे,
अन्धेरे मै डूबा है जहां मेरा,
रौशनी मेरी इस जिन्दगी मै तू अब कर दे...





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