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राज़ छुपाकर रक्खा है...

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इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... जो शामिल नही जिन्दगी मै मेरी, उस शख्स को शामिल रक्खा है... मिली नही मुहब्बत जिसकी, मेरी मुहब्बत को उसके लिये रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... चाहा नही जिसने हमे कभी, अपनी चाहत को उसके लिये रक्खा है... बेवफाई से उसका नाता सही, मेरा दिल वफ़ा का उसके लिये रक्खा है... जो छोड़कर मुझे अँधेरों मै गया, मेरे दिल मै उजाला उसके लिये रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इस दिल मै दबाकर रक्खा है... मेरे दिल को जिसने दिल ना समझा, उसके नाम को सीने मै दबाकर रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... इक राज़ छुपाकर रक्खा है... _KD...

बुद्ध हो जायेंगे हम...

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प्रेम से अनुराग से शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... द्वेष और नफरतों को पी शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... सच्चाई के पथ पर जो चलो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... हृदय को जो निर्मल रखो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... मौक्ष का जो मन रखो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम... जीवन का अर्थ समझो तो शुद्ध हो जायेंगे हम... बुद्ध हो जायेंगे हम...

मेरे कमरे की वो खिड़की...

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मेरे कमरे की खिड़की से, वो खुला आसमान नजर आता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... हवा का झौंका वो सुबह-सुबह का, छूकर गुजर जाता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मन्दिर के वो भजन घन्टियाँ, सुबह-शाम सुनाई देती है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मेरे कमरे की खिडकी से, तितलियाँ रँग-बिरंगी नजर आती मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... रातो मै तारो की वो जगमग, दूर उस आसमान मै नजर आती है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... चिड़ियों की चहचहाट मै भी, मधुर संगीत सुनाई देता है मुझको,, माँ ये बहुत भाता है मुझको... मेरे बचपन का वो कमरा, वो खिड़की , और मेरा वो खुला आसमान,, माँ ये बहुत भाता था मुझको... गाँव अपना बहुत याद आता है मुझको,, बहुत याद आता है मुझको...

तुझसे दूर नही हूँ मैं...

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तुझसे दूर नही हूँ मैं... तेरे पास तेरे करीब हूँ मै,, दिल का तेरा एहसास हूँ मैं... सावन की घनघोर घटा बरसती है जब, वो तेज बरसता पानी हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... जो सरसराहट से गुजर जाती है तुझे छूकर, वो तेज हवा का झौंका हूँ मैं... तेरे मखमल से पैरो तले जो दबती है, वो हरी दूब की घांस हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... कहर बरसाती उस धूप मै भी, वो ठंडी-ठंडी छाँव हूँ मैं... दुख जब तुझको बड़ा रुलाये, सुख की तेरी उम्मीद हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... तेरे लबों पर जो रुक-रुक कर आये, वो मन्द-मन्द मुस्कान हूँ मैं... जो धड़कता है तेरे दिल मै, उस दिल का अरमान हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं... तुझसे दूर नही हूँ मैं...

जो तुम आओ तो...

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हाल-ए-दिल बयाँ कर दें , ज़ख्म खुद्के खुद से ही भर दें , जो तुम आओ तो... गर्म रेत भी ठण्डी कर दें , उस तपिश को बारिश कर दें , जो तुम आओ तो... धरती बंजर हरी कर दें , घाटी वो फिर फूलो सी कर दें , जो तुम आओ तो... इस घर को मन्दिर कर दें , बुझते दिये को फिर भर दें , जो तुम आओ तो... आँखो मै चमक कर दें , होंठो पर हँसी कर दें , जो तुम आओ तो... फूलों मै महक कर दें , भवरों को अमर कर दें , जो तुम आओ तो...

एक बात बताओगे...

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एक बात बताओगे, क्या हम से मुहब्बत निभाओगे... हमे नीन्द बहुत आती है, क्या बिना बात किये रह पाओगे... एक बात बताओगे, क्या हम से वफ़ा निभाओगे... हम उड़ते हुये पंछी है, क्या सारा जहां हमे दे पाओगे... एक बात बताओगे, क्या हर वादा निभाओगे... हम अपनी बात के पक्के है, क्या तुम अपनी बात पर रह पाओगे... एक बात बताओगे, क्या मिलकर जिन्दगी बिताओगे... हमे साथ-साथ चलना है, क्या तुम भी कदम से कदम मिला पाओगे...

नींद मै कविता लिख रही हूँ...

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नींद मै कविता लिख रही हूँ , कुछ हक़ीक़त कुछ सपने लिख रही हूँ , जो समझ सके दिल की बात वो बात लिख रही हूँ... तेरे-मेरे गम हो कम वो दर्द लिख रही हूँ , छुपा के सारे शहर से तेरा नाम लिख रही हूँ , मिल जाये सारा जहां वो अरमान लिख रही हूँ... दिल के अपने घावों की दवा मै लिख रही हूँ , जो तुझको हो पसन्द वो बात लिख रही हूँ , तेरे-मेरे प्रेम के एहसास मै लिख रही हूँ... नींद मै कविता लिख रही हूँ  , चाँद और तारों की बात लिख रही हूँ , जो कर सके तू एहसास, वो जज़्बात लिख रही हूँ...